
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रम्प की हालत खराब, डेमोक्रेट्स की बढ़त से रिपब्लिकन खेमे में बढ़ी बेचैनी!
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रम्प की हालत खराब, डेमोक्रेट्स की बढ़त से रिपब्लिकन खेमे में बढ़ी बेचैनी!
US MIDTERM ELECTION: अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी रिपब्लिकन पार्टी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। चुनाव से ठीक पहले सामने आ रहे सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिल रही है। ऐसे में अमेरिकी राजनीति में सत्ता के संतुलन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि इन चुनावों के नतीजे ट्रम्प के राष्ट्रपति कार्यकाल के अगले दो वर्षों की राजनीतिक दिशा तय कर सकते हैं।
संसद पर कब्जे की लड़ाई
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में होते हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर मतदान होना है। फिलहाल दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है, लेकिन डेमोक्रेट्स इस स्थिति को बदलने की कोशिश में जुटे हैं।
रिपब्लिकन पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रतिनिधि सभा में अपना बहुमत बचाए रखना है। चुनावी सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट्स को यहां बेहतर स्थिति में दिखाया जा रहा है। अगर डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर लेती है, तो ट्रम्प के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना काफी मुश्किल हो सकता है।
सर्वेक्षणों में ट्रम्प की लोकप्रियता में गिरावट
राष्ट्रपति ट्रम्प की लोकप्रियता में आई गिरावट रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है। रॉयटर्स और इप्सोस के 26 अक्टूबर को सामने आए सर्वेक्षण के मुताबिक, ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग 32 प्रतिशत रही। वहीं, कांग्रेस के चुनाव में पंजीकृत मतदाताओं के बीच डेमोक्रेट्स को 47 प्रतिशत और रिपब्लिकन को 36 प्रतिशत समर्थन मिला।
इस सर्वेक्षण में महंगाई, पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को चुनाव के प्रमुख मुद्दों के रूप में देखा गया। अमेरिका में बड़ी संख्या में मतदाता जीवनयापन की बढ़ती लागत से परेशान हैं। इसका राजनीतिक नुकसान ट्रम्प प्रशासन को उठाना पड़ सकता है।
ईरान के साथ तनाव भी बना मुद्दा
अमेरिका की विदेश नीति और ईरान के साथ बढ़ा सैन्य तनाव भी चुनावी चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ईरान से जुड़े घटनाक्रम के बाद ऊर्जा और ईंधन की कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी इन मुद्दों पर ट्रम्प प्रशासन को घेर रही है।
डेमोक्रेट्स का आरोप है कि सरकार आम नागरिकों की आर्थिक परेशानियों का समाधान करने में सफल नहीं रही है। दूसरी तरफ रिपब्लिकन पार्टी अपनी नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर मतदाताओं का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।
सीनेट में भी कांटे की टक्कर
प्रतिनिधि सभा के मुकाबले सीनेट की तस्वीर अधिक जटिल बनी हुई है। यहां रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सीटों का बहुमत है, जबकि डेमोक्रेट्स के साथ दो निर्दलीय सांसद भी हैं। सीनेट में बहुमत हासिल करने के लिए डेमोक्रेट्स को चार सीटों का शुद्ध फायदा चाहिए।
कई राज्यों में मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। ऐसे में सीनेट पर किस पार्टी का नियंत्रण होगा, इसका फैसला कुछ करीबी चुनावी मुकाबलों से हो सकता है।
ट्रम्प के राजनीतिक भविष्य पर भी असर
मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा नुकसान होता है तो इसका असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रम्प की पार्टी के भीतर उनकी नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठ सकते हैं। वहीं, डेमोक्रेट्स को संसद में ताकत मिलने से वे ट्रम्प प्रशासन की नीतियों की जांच और सरकारी फैसलों पर निगरानी बढ़ा सकते हैं।
हालांकि, यदि रिपब्लिकन पार्टी अपना बहुमत बचाने में सफल रहती है तो ट्रम्प को बड़ी राजनीतिक राहत मिलेगी और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है।
3 नवंबर पर टिकी दुनिया की नजरें
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव को ट्रम्प सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। डेमोक्रेट्स बढ़त बनाने की कोशिश में हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी अपनी सत्ता बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
फिलहाल सर्वेक्षण डेमोक्रेट्स के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला अमेरिकी मतदाता करेंगे। ऐसे में 3 नवंबर को आने वाले चुनावी नतीजे तय करेंगे कि ट्रम्प की राजनीतिक ताकत बढ़ेगी या उनके सामने अगले दो वर्षों के लिए नई चुनौतियां खड़ी होंगी।