diwali horizontal

यूपी अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष पद खाली, कांग्रेस नेता शाहनवाज आलम ने योगी सरकार पर साधा निशाना

0 217

यूपी अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष पद खाली, कांग्रेस नेता शाहनवाज आलम ने योगी सरकार पर साधा निशाना

राजधानी लखनऊ में अखिल भारतीय कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग में पिछले डेढ़ साल से अध्यक्ष पद खाली पड़े होने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने योगी सरकार पर आयोग को जानबूझकर निष्क्रिय रखने का आरोप लगाते हुए तत्काल अध्यक्ष की नियुक्ति और आयोग को सक्रिय करने की मांग की है।

पीड़ितों के लिए न्याय का मंच बताया आयोग
शाहनवाज आलम ने कहा कि अल्पसंख्यक आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जहां अल्पसंख्यक समुदाय के लोग न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि आयोग में आने वाली शिकायतों में बड़ी संख्या पुलिस उत्पीड़न और जमीन से जुड़े मामलों की होती है। ऐसे में अध्यक्ष पद का लंबे समय से खाली रहना बेहद गंभीर स्थिति है।

सरकार पर जानबूझकर निष्क्रिय रखने का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि आयोग को निष्क्रिय रखने का उद्देश्य यह है कि पीड़ित लोग पुलिस और प्रशासन के खिलाफ शिकायत दर्ज न करा सकें। उनका कहना था कि इससे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हो रही कथित हिंसा और उत्पीड़न के मामलों में पुलिस की जवाबदेही तय नहीं हो पाती।

भूमि विवादों में भी नुकसान का दावा
शाहनवाज आलम ने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में आयोग की निष्क्रियता का सीधा नुकसान अल्पसंख्यक समुदाय को हो रहा है। इससे यह संदेश जाता है कि अल्पसंख्यकों की जमीनों पर कथित रूप से भू-माफियाओं के कब्जे को संरक्षण मिल रहा है।

संविधान और सुप्रीम कोर्ट से लगाई उम्मीद
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और न्याय की गारंटी भारतीय संविधान देता है, लेकिन उत्तर प्रदेश में 27 जून 2024 से अल्पसंख्यक आयोग प्रभावी रूप से निष्क्रिय है। ऐसे में संविधान की संरक्षक संस्था होने के नाते सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर राज्य सरकार को नोटिस जारी करना चाहिए।

न्याय तक पहुंच का अहम माध्यम
शाहनवाज आलम ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर मुसलमान, आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर होने के कारण अक्सर सीधे न्यायपालिका तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में अल्पसंख्यक आयोग उनके लिए न्याय पाने का सुलभ और कम खर्चीला माध्यम है। आयोग को निष्क्रिय रखना अल्पसंख्यकों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने जैसा है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.