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इजराइल में किसकी बनेगी सरकार? चुनावी नतीजों से नेतन्याहू की सत्ता पर सस्पेंस, नए गठबंधन पर टिकी सबकी निगाहें!

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इजराइल में किसकी बनेगी सरकार? चुनावी नतीजों से नेतन्याहू की सत्ता पर सस्पेंस, नए गठबंधन पर टिकी सबकी निगाहें!

ISRAEL NEWS: इस्राइल में अगली सरकार किसकी बनेगी, इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। चुनावी समीकरण, विभिन्न राजनीतिक दलों की स्थिति और संभावित गठबंधन को लेकर देश की राजनीति में हलचल बनी हुई है। सरकार बनाने के लिए जरूरी संसदीय समर्थन जुटाना सभी राजनीतिक दलों के सामने बड़ी चुनौती है।

इस्राइल की संसदीय व्यवस्था में किसी एक पार्टी के लिए स्पष्ट बहुमत हासिल करना हमेशा आसान नहीं रहा है। ऐसे में चुनाव के बाद गठबंधन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। जिस राजनीतिक गठबंधन को संसद में बहुमत का समर्थन मिलता है, वही सरकार बनाने की स्थिति में आता है। यही वजह है कि चुनावी नतीजों के साथ-साथ छोटे दलों और उनके समर्थन को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

चुनावी नतीजों ने बढ़ाई सियासी उलझन

27 अक्टूबर 2026 को हुए चुनाव के अंतिम नतीजों के मुताबिक, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी को 21 सीटें मिली हैं। बेयाखद गठबंधन को 12 और जॉइंट लिस्ट को 11 सीटें हासिल हुई हैं।
120 सदस्यों वाली इजराइली संसद में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। लेकिन नेतन्याहू के समर्थन वाले गठबंधन को केवल 53 सीटें मिली हैं, जबकि मुख्य विपक्षी गठबंधन 48 सीटों पर है। अरब दलों के खाते में कुल 19 सीटें आई हैं। इस तरह किसी भी खेमे को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।

अरब दलों की भूमिका हो सकती है अहम

इस चुनाव में अरब दलों ने कुल 19 सीटें हासिल कर महत्वपूर्ण राजनीतिक स्थिति बना ली है। विपक्षी गठबंधन यदि इन दलों का समर्थन हासिल करने में सफल रहता है तो सरकार बनाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, अरब दलों के साथ गठबंधन को लेकर विपक्षी खेमे में भी मतभेद हैं। कई दलों ने चुनाव के दौरान उनके साथ औपचारिक गठबंधन से दूरी बनाए रखने की बात कही थी। ऐसे में बातचीत आसान नहीं होगी।

क्या बन सकती है साझा सरकार?

इजराइल में एक और संभावना साझा सरकार की है। इसके तहत नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और विपक्ष के कुछ दल मिलकर राष्ट्रीय एकता सरकार बना सकते हैं। हालांकि, नेतन्याहू को हटाने के वादे के साथ चुनाव लड़ने वाले विपक्षी नेताओं के लिए उनके साथ सत्ता साझा करना राजनीतिक रूप से कठिन फैसला हो सकता है।

दूसरी ओर, नेतन्याहू के लिए भी अपने पुराने सहयोगियों से अलग होकर नए राजनीतिक साझेदारों के साथ सरकार बनाना आसान नहीं होगा। इसलिए आने वाले दिनों में गठबंधन की बातचीत काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है।

राष्ट्रपति की भूमिका होगी महत्वपूर्ण

इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग चुनाव परिणामों की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वह उस नेता को सरकार बनाने का अवसर देंगे, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे बेहतर संभावना होगी। यदि तय समय में कोई भी नेता सरकार बनाने में सफल नहीं होता है तो देश में दोबारा चुनाव कराने की नौबत भी आ सकती है। नई संसद का शपथ ग्रहण 10 नवंबर को निर्धारित है।

फिलहाल सत्ता की चाबी गठबंधन के हाथ में

इजराइल के चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि सबसे बड़ी पार्टी बनना और सरकार बनाना दो अलग-अलग बातें हैं। नेतन्याहू की पार्टी सबसे आगे जरूर है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा दूर है। वहीं विपक्ष के सामने भी अलग-अलग विचारधारा वाले दलों को एक मंच पर लाने की चुनौती है।

अब सबकी निगाहें राष्ट्रपति की बातचीत और राजनीतिक दलों के बीच होने वाले समझौतों पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि नेतन्याहू अपनी सत्ता बचा पाते हैं या विपक्ष नया गठबंधन बनाकर इजराइल में सरकार बदलने में सफल होता है।

इजराइल की राजनीति में फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। सरकार का फैसला चुनावी सीटों से ज्यादा गठबंधन की बातचीत तय करेगी।

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