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US को सपोर्ट करना पड़ा भारी?UAE पर ईरान का सबसे बड़ा वार?

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US को सपोर्ट करना पड़ा भारी?UAE पर ईरान का सबसे बड़ा वार?

IRAN -US TENSION:मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरानी सरकारी मीडिया के दावों के अनुसार, ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है। इस दावे के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने दावा किया है कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने अबू धाबी के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक रणनीतिक एयर बेस पर कार्रवाई की। तेहरान का कहना है कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य उन सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाना था, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर ईरान के खिलाफ अभियानों में किया जा रहा था। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि यूएई की धरती का उपयोग उसके विरोधियों द्वारा ईरानी ठिकानों के खिलाफ किया गया था।

ईरानी अधिकारियों का दावा है कि इस कार्रवाई में एयर बेस के कुछ सैन्य ढांचे और विमान संबंधी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और यूएई की ओर से भी सभी दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे मामलों में युद्धरत पक्षों के दावों को सावधानी से देखना जरूरी होता है।

इस घटनाक्रम के पीछे एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यूएई की अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ बढ़ती रणनीतिक साझेदारी अब उसे सीधे क्षेत्रीय संघर्षों के केंद्र में ला रही है? पिछले कुछ महीनों में ईरान ने कई बार संकेत दिए हैं कि वह उन देशों को भी निशाने पर मानता है, जिनकी धरती से उसके खिलाफ सैन्य गतिविधियां संचालित होने का उसे संदेह है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल ईरान और यूएई तक सीमित नहीं रहेगा। खाड़ी क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है और किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हाल के तनावों के दौरान तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी देखा गया है।

इस बीच क्षेत्र के कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच टकराव बढ़ता है तो यह पूरे मध्य पूर्व के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह हमला क्षेत्रीय संघर्ष के एक नए चरण की शुरुआत है या फिर आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास तनाव को कम करने में सफल होंगे। दुनिया की निगाहें अब तेहरान, अबू धाबी और वाशिंगटन पर टिकी हुई हैं।

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