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प्रियांक खड़गे ने मांगे RSS से दस्तावेज

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प्रियांक खड़गे ने मांगे RSS से दस्तावेज

INDIA LIVE: कर्नाटक के ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री प्रियांक खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखकर संगठन के पंजीकरण, फंडिंग के स्रोतों, और कानूनी स्थिति के दस्तावेज मांगे हैं। 

प्रियांक खड़गे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश में पारदर्शिता और जवाबदेही सभी संस्थाओं के लिए समान रूप से आवश्यक है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजनीतिक दलों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और अन्य संस्थाओं से विभिन्न प्रकार के दस्तावेज मांगे जाते हैं, तो RSS को भी अपनी कार्यप्रणाली से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए।

खड़गे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को यह जानने का अधिकार है कि बड़े सामाजिक संगठनों का संचालन किस प्रकार होता है और उनकी वित्तीय व्यवस्था कैसी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग किसी संगठन को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए है।

वहीं, RSS समर्थकों और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इस बयान पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि RSS एक वैचारिक और सामाजिक संगठन है, जो वर्षों से राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सेवा के कार्यों में लगा हुआ है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस RSS को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच वैचारिक टकराव एक बार फिर तेज हो सकता है। आगामी चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति के संदर्भ में भी इस मुद्दे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल RSS की ओर से इस मांग पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन प्रियांक खड़गे के बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

 

इस पूरे विवाद से जुड़े मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
    • पत्र में मांगे गए दस्तावेज: मंत्री ने पूछा है कि 60,000 से अधिक शाखाओं वाले और करोड़ों स्वयंसेवकों का दावा करने वाले इतने बड़े संगठन का पंजीकरण (Registration) किस कानून के तहत हुआ है!
    • पारदर्शिता और जवाबदेही: उन्होंने मांग की है कि संघ अपने चंदे, संपत्तियों, और टैक्स संबंधी रिकॉर्ड सार्वजनिक करे, क्योंकि सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले हर संगठन को संविधान के दायरे में रहना चाहिए। 
    • मोहन भागवत का जवाब: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इस मांग को एक ‘राजनीतिक नौटंकी’ करार देते हुए ख़ारिज कर दिया है। उनका तर्क है कि संघ कोई सरकारी अनुदान नहीं लेता, इसलिए उसे पंजीकरण की कोई आवश्यकता नहीं है और यह संस्था 100 वर्षों से देश में काम कर रही है।

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