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हमास, हिज़्बुल्लाह और हूती एक मंच पर नज़र आए!

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हमास, हिज़्बुल्लाह और हूती एक मंच पर नज़र आए!

TEHRAN Live: आज के इस वीडियो में हम बात करेंगे ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े उस घटनाक्रम की, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। तेहरान में आयोजित इस अंतिम विदाई समारोह में सिर्फ लाखों लोगों की मौजूदगी ही चर्चा का विषय नहीं बनी, बल्कि फिलिस्तीनी संगठन हमास, लेबनान के हिज़्बुल्लाह और यमन के हूती आंदोलन के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बना दिया। इसके बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या ईरान दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि उसका तथाकथित “Axis of Resistance” अब भी सक्रिय और प्रभावशाली है? और क्या यह आयोजन पश्चिम एशिया की बदलती रणनीति का संकेत माना जा सकता है? आइए विस्तार से समझते हैं।

तेहरान में हुए अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में आम नागरिकों के साथ कई देशों के प्रतिनिधिमंडल भी पहुंचे। सबसे ज्यादा चर्चा उन प्रतिनिधियों की रही, जो ईरान समर्थक माने जाने वाले संगठनों से जुड़े थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की मौजूदगी केवल शोक प्रकट करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि इससे राजनीतिक और कूटनीतिक संकेत भी निकलते हैं। ईरान लंबे समय से फिलिस्तीन, लेबनान और यमन में अपने सहयोगी समूहों के साथ संबंध बनाए रखता आया है।

ऐसे में इन संगठनों के प्रतिनिधियों का एक साथ दिखाई देना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि क्षेत्रीय गठजोड़ अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी समारोह में शामिल होना अपने आप में किसी सैन्य कार्रवाई या नए गठबंधन की घोषणा नहीं माना जा सकता।

अब सवाल उठता है कि आखिर “Axis of Resistance” क्या है? आम तौर पर इस शब्द का इस्तेमाल उन समूहों और संगठनों के लिए किया जाता है जो ईरान के करीबी माने जाते हैं और जो पश्चिम एशिया में अमेरिका तथा इज़राइल की नीतियों का विरोध करते हैं। इसमें हमास, हिज़्बुल्लाह, हूती आंदोलन और कुछ अन्य संगठन शामिल बताए जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में इज़राइल और इन संगठनों के बीच कई बार तनाव और संघर्ष देखने को मिला है। इसी वजह से तेहरान में इन प्रतिनिधियों की मौजूदगी को कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने प्रतीकात्मक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम था और इसे सैन्य या राजनीतिक संदेश के रूप में देखना जल्दबाज़ी होगी।

इज़राइल और अमेरिका पहले से ही ईरान समर्थित नेटवर्क को लेकर सतर्क रहे हैं। दोनों देशों का आरोप रहा है कि ईरान क्षेत्र के कई सशस्त्र संगठनों को समर्थन देता है, जबकि ईरान इन आरोपों को अलग-अलग मौकों पर अलग तरीके से खारिज करता रहा है या अपने क्षेत्रीय संबंधों को राजनीतिक समर्थन बताता है। अंतिम संस्कार के दौरान इन प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बाद सुरक्षा और रणनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि अभी तक ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है जिससे यह कहा जा सके कि इस समारोह के बाद कोई नया सैन्य गठबंधन बना है या किसी बड़े अभियान की शुरुआत होने वाली है। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को फिलहाल राजनीतिक संकेतों और क्षेत्रीय संदेशों के संदर्भ में ही देखा जा रहा है।

मध्य पूर्व की राजनीति हमेशा से जटिल रही है, जहां हर सार्वजनिक कार्यक्रम का कूटनीतिक महत्व भी निकाला जाता है। यही वजह है कि तेहरान में हुए इस अंतिम संस्कार को केवल धार्मिक या पारिवारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक आयोजन के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान, इज़राइल, अमेरिका और क्षेत्र के अन्य देशों की ओर से क्या प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं। यदि तनाव बढ़ता है तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि इस समारोह ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान मध्य पूर्व की ओर खींच दिया है। लेकिन किसी भी बड़े निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक बयानों, कूटनीतिक घटनाक्रम और विश्वसनीय तथ्यों का इंतजार करना जरूरी होगा।

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